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Post by : Shreyan college
Post Date : 24-Dec-2025
फायर सेफ्टी से जुड़े मिथक जो जानलेवा साबित हो सकते हैं – फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी से जागरूकता

फायर सेफ्टी से जुड़े मिथक जो जानलेवा साबित हो सकते हैं – फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी से जागरूकता

अक्सर आग की घटनाएँ इसलिए घातक बन जाती हैं क्योंकि लोग फायर सेफ्टी से जुड़े खतरनाक मिथकों पर विश्वास कर लेते हैं, न कि इसलिए कि वे लापरवाह होते हैं। आपात स्थिति में गलत जानकारी एक छोटी घटना को भी जानलेवा आपदा में बदल सकती है। फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी के विशेषज्ञों के अनुसार, फायर सेफ्टी उपकरणों के साथ-साथ आग के व्यवहार की सच्ची जानकारी होना भी उतना ही ज़रूरी है।

आइए उन आम फायर सेफ्टी मिथकों को समझें जो जान जोखिम में डाल सकते हैं, और उनके पीछे की सच्चाई जानें।

मिथक 1: पानी हर तरह की आग बुझा देता है

सच्चाई:
पानी कुछ आगों को और ज़्यादा भड़का सकता है। जैसे:

  • इलेक्ट्रिकल आग में पानी डालने से करंट लग सकता है
  • तेल और ग्रीस की आग में पानी डालने से आग तेज़ी से फैलती है

ट्रेनिंग संस्थान और हर फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी यह सिखाते हैं कि हर फायर क्लास के लिए सही फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग ज़रूरी है। यह जानकारी जान और संपत्ति दोनों बचा सकती है।

मिथक 2: छोटी आग हानिरहित होती है

सच्चाई:
कई बड़ी आग की घटनाएँ छोटी-सी चिंगारी से शुरू होती हैं। एक छोटी आग:

  • कुछ ही सेकंड में तेज़ी से फैल सकती है
  • ज़हरीले धुएँ से पूरा कमरा भर सकती है
  • बाहर निकलने के रास्ते बंद कर सकती है

फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी के विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि छोटी आग को नज़रअंदाज़ करना या देर करना मौत का बड़ा कारण बन सकता है।

मिथक 3: फायर अलार्म सिर्फ़ बड़ी इमारतों में ज़रूरी होते हैं

सच्चाई:
आग छोटे-बड़े भवनों में फर्क नहीं करती। घर, दुकान और ऑफिस—सभी में ज़रूरी है:

  • स्मोक डिटेक्टर
  • फायर अलार्म
  • साफ़ और खुले एग्ज़िट रास्ते

फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी के प्रशिक्षकों के अनुसार, अलार्म से समय पर चेतावनी मिलने से आग में चोट और मौत के मामलों में काफ़ी कमी आती है।

मिथक 4: फायर एक्सटिंग्विशर चलाना बहुत मुश्किल होता है

सच्चाई:
फायर एक्सटिंग्विशर इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि थोड़ी-सी ट्रेनिंग के बाद कोई भी उन्हें सुरक्षित रूप से चला सके। ज़्यादातर फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी में PASS तरीका सिखाया जाता है:

  • P – पिन खींचें
  • A – आग के आधार पर निशाना लगाएँ
  • S – हैंडल दबाएँ
  • S – दाएँ-बाएँ झाड़ू की तरह चलाएँ

समस्या जटिलता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की कमी होती है।

मिथक 5: आग सिर्फ़ बड़े हादसों से लगती है

सच्चाई:
अधिकांश आग रोज़मर्रा की लापरवाही से लगती है, जैसे:

  • ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सॉकेट
  • खराब हाउसकीपिंग
  • बिना देखरेख के खाना पकाना
  • खराब वायरिंग

फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी के कोर्स में रोकथाम पर विशेष ज़ोर दिया जाता है, क्योंकि आग से लड़ने से बेहतर है आग को लगने से रोकना।

मिथक 6: फायर ड्रिल समय की बर्बादी है

सच्चाई:
फायर ड्रिल लोगों को आपात स्थिति में शांत और सही प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करती है। नियमित ड्रिल करने वाली इमारतों में:

  • तेज़ और सुरक्षित निकासी होती है
  • चोटों की संख्या कम होती है
  • बेहतर तालमेल बनता है

हर प्रतिष्ठित फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी फायर ड्रिल को कार्यस्थल और आवासीय सुरक्षा का अहम हिस्सा मानता है।

फायर सेफ्टी शिक्षा क्यों ज़रूरी है

मिथकों पर विश्वास जानलेवा हो सकता है, लेकिन सही शिक्षा जान बचाती है। प्रमाणित कोर्स में दाख़िला लेना या फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी में प्रशिक्षित पेशेवरों से सीखना व्यक्तियों, संगठनों और समाज को हमेशा तैयार रखता है।

फायर सेफ्टी जागरूकता कोई विकल्प नहीं—यह अनिवार्य है।

अंतिम विचार

फायर सेफ्टी से जुड़े मिथक झूठा सुरक्षा-भाव पैदा करते हैं और ज़रूरी कार्रवाई में देरी करवाते हैं। सच्चाई जानकर और फायर एंड सेफ्टी कॉलेज इन वाराणसी के विशेषज्ञों से सीखकर आप अपने परिवार, कार्यस्थल और खुद की सुरक्षा कर सकते हैं।

जानकारी रखें। सतर्क रहें। फायर सेफ्टी जीवन बचाती है।

 

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